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Nepal: नई सरकार बनाने के लिए पीएम देउबा और प्रचंड सहमत, परिणामों में सत्तारूढ़ गठबंधन को 85 सीटों के साथ बढ़त

एजेंसी, काठमांडो। Published by: देव कश्यप Updated Sun, 27 Nov 2022 09:51 PM IST
सार

गठबंधन में प्रधानमंत्री देउबा के नेतृत्व वाली नेपाली कांग्रेस, प्रचंड के नेतृत्व वाली सीपीएन-माओवादी, माधव नेपाल की अध्यक्षता वाली सीपीएन-यूनिफाइड सोशलिस्ट, महंत ठाकुर की लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी और चित्रा बहादुर के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनमोर्चा शामिल हैं।

नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा।
नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा। - फोटो : ANI
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विस्तार

प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और सीपीएन-माओवादी केंद्र के अध्यक्ष पुष्पकमल दहल प्रचंड नेपाल में नई सरकार बनाने के लिए सहमत हो गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, शनिवार को हुई बैठक में दोनों नेता देश में नई बहुमत वाली सरकार में अपने सत्तारूढ़ पांच दलों के गठबंधन को जारी रखने पर सहमत हुए। सत्तारूढ़ गठबंधन ने अब तक 85 सीटें हासिल की हैं, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली के नेतृत्व वाले सीपीएन-यूएमएल गठबंधन ने सीधे चुनाव के तहत 55 सीटें जीतीं हैं।



गठबंधन में प्रधानमंत्री देउबा के नेतृत्व वाली नेपाली कांग्रेस, प्रचंड के नेतृत्व वाली सीपीएन-माओवादी, माधव नेपाल की अध्यक्षता वाली सीपीएन-यूनिफाइड सोशलिस्ट, महंत ठाकुर की लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी और चित्रा बहादुर के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनमोर्चा शामिल हैं।


नेपाली कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी
प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की सत्तारूढ़ नेपाली कांग्रेस अब तक सामने आए नतीजों में 53 सीट पर जीत दर्ज करके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। देश की 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा की 165 सीट का चुनाव प्रत्यक्ष मतदान से जबकि शेष 110 सीट का चुनाव आनुपातिक चुनाव प्रणाली के जरिए होता है। प्रतिनिधि सभा और सात प्रांतीय विधानसभाओं के चुनाव 20 नवंबर को हुए थे। मतों की गिनती सोमवार को शुरू हुई थी।

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (यूएमएल) ने 42 सीट पर जीत दर्ज की है। इसके अलावा सीपीएन-माओवादी सेंटर 17 सीट जीतकर तीसरी बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। सीपीएन-यूनिफाइड सोशलिस्ट ने 10 सीट जीती हैं। नवगठित राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने सात-सात सीटों पर कब्जा जमाया है। निर्दलीय उम्मीदवारों एवं अन्य छोटे दलों के खाते में 21 सीट गई हैं। 165 सीट में से 21 के नतीजे आने बाकी हैं। पांच दलों के सत्तारूढ़ गठबंधन ने 85 सीटों पर जीत हासिल की हैं, जबकि सीपीएन-यूएमएल के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 55 सीट पर कब्जा जमाया है।

मंत्रियों और 60 सांसदों सहित कई वरिष्ठ नेता हारे

  • संसदीय चुनावों में मंत्रियों और 60 मौजूदा सांसदों सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के कई वरिष्ठ नेताओं को शिकस्त का सामना करना पड़ा है। इस दौरान युवाओं ने जीत दर्ज की है। 
  • मधेस (तराई) क्षेत्र आधारित दलों के दो वरिष्ठ नेता चुनाव हार गए, जिनमें जनता समाजवादी पार्टी के प्रमुख उपेंद्र यादव और लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता राजेंद्र महतो शामिल हैं। 
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  • देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) :सीपएन-यूएमएल: से चुनाव हारने वालों में पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ईश्वर पोखरेल,उपाध्यक्ष सुरेंद्र पांडे, महासचिव शंकर पोखरेल और उप महासचिव प्रदीप गयावली शामिल हैं। 
  • शिकस्त का सामना करने वाले अन्य शीर्ष नेताओं में सीपीएन माओइस्ट-सेंटर के महासचिव देव गुरुंग, उप महासचिव और ऊर्जा मंत्री पम्पा भुशाल और उप महासचिव गिरिराजमणि पोखरेल शामिल हैं। 
  • गृह मंत्री और नेपाली कांग्रेस के नेता बालकृष्ण खांड और मौजूदा सरकार में पर्यटन एवं नागर विमानन मंत्री जीवन राम श्रेष्ठ भी चुनाव हार गये।
  • पूर्व प्रधानमंत्री एवं सीपीएन-यूनिफाइड सोशलिस्ट के वरिष्ठ नेता झालानाथ खनल और पूर्व विदेश मंत्री एवं नेपाली कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सुजाता कोइराला को भी चुनाव में शिकस्त मिली है।
  • पूर्व टीवी पत्रकार रवि लमीछाने द्वारा महज छह महीने पहले गठित राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने प्रत्यक्ष चुनाव में सात सीट पर जीत दर्ज की।


मतगणना में पिछड़े तो ओली का ‘कम्युनिस्ट एकता’ दांव
नेपाल के आम चुनाव में सत्ताधारी नेपाली कांग्रेस के गठबंधन की लगातार बढ़त को देखते हुए पूर्व प्रधानमंत्री और चीन के करीबी केपी शर्मा ओली ने एक बार फिर से ‘कम्युनिस्ट एकता’ का दांव चला है। उन्होंने फोन करके कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओवादी सेंटर) के प्रमुख पुष्प कमल दहल को उनकी जीत पर बधाई दी और साथ मिलकर सरकार बनाने का प्रस्ताव दे दिया।

हालांकि दहल ने ओली के प्रस्ताव पर कोई जवाब नहीं दिया है लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षक ओली के इस दांव को गंभीर मान रहे हैं, क्योंकि सत्ताधारी गठबंधन में दहल की पार्टी दूसरे नंबर पर है। नेपाल की राजनीति के कद्दावर नेता उपेंद्र कुमार ने कहा है कि अभी से कुछ कहना मुश्किल है क्योंकि सत्ताधारी गठबंधन जरूरी बहुमत के आंकड़े के काफी करीब पहुंचता जा रहा है। लेकिन कम्युनिस्ट एकता का दांव आखिरी मौके पर तभी काम आएगा जब ओली के पास पर्याप्त सीटें हों।

सत्ताधारी गठबंधन टूटना मुश्किल
डेढ़ साल पहले तक दहल और ओली एक ही पार्टी का हिस्सा थे। लेकिन पार्टी बंटी व प्रचंड ने नेकां से हाथ मिला लिया। उसी समय माधव कुमार नेपाल ने भी ओली से अलग होकर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल के नाम से अपनी अलग पार्टी बना ली। यह पार्टी भी सत्ताधारी गठबंधन में शामिल है।

पर्यवेक्षकों के मुताबिक, अगर ये दोनों पार्टियां यूएमएल से मिल जाएं, तो ‘कम्युनिस्ट सरकार’ बनने की संभावना मजबूत हो जाएगी। वैसे इन अटकलों पर माओवादी सेंटर के पोलित ब्यूरो के सदस्य सुनील मानधर सत्ताधारी गठबंधन टूटने से इनकार किया है।

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