रिपोर्ट में दावा: अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हुआ, तो चीन उसे दे सकता है मान्यता

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 13 Aug 2021 01:31 PM IST

सार

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आतंकवादी समूह अब तक अफगानिस्तान के 34 प्रांतों में से आठ को पूरी तरह से नियंत्रित कर चुका है। हालांकि, तालिबान ने 13 से अधिक प्रांतों पर कब्जा करने का दावा किया है।
अफगान तालिबान राजनीतिक आयोग के प्रमुख मुल्ला अब्दुल गनी बरादार के साथ चीनी विदेश मंत्री वांग यी
अफगान तालिबान राजनीतिक आयोग के प्रमुख मुल्ला अब्दुल गनी बरादार के साथ चीनी विदेश मंत्री वांग यी - फोटो : ANI
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विस्तार

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे की स्थिति में चीन उसे मान्यता दे सकता है। अमेरिकी समाचार में इस बात का दावा किया गया है। इसमें बताया गया है कि अगर आतंकी संगठन अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज होने में कामयाब होता है, तो चीन तालिबान को वैध शासक के रूप में मान्यता देने के लिए तैयार है। सूत्रों का हवाला देते हुए अमेरिकी प्रकाशन के मुताबिक, अफगानिस्तान में मौजूदा स्थिति पर नजर रख रहे नए चीनी सैन्य और खुफिया आकलन ने उन्हें आतंकवादी समूह के साथ अपने संबंधों को औपचारिक रूप देने के लिए प्रेरित किया है। 
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तालिबान ने मई से अफगानिस्तान पर कब्जे के इरादे से जंग शुरू की थी और एक के बाद एक शहरों को अपने कब्जे में करता काबुल की ओर चला रहा है। लॉन्ग वॉर जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, पहले से तालिबान की 73 जिलों पर मजबूत पकड़ थी। अब उसने 160 से अधिक जिलों को अपने कब्जे में ले लिया है। इसमें कहा गया है कि आतंकवादी समूह अब अफगानिस्तान के 34 प्रांतों में से आठ को पूरी तरह से नियंत्रित करता है। तालिबान ने अफगान प्रांतों के 34 प्रशासनिक केंद्रों में से 13 से अधिक पर कब्जा करने का दावा किया है।




अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की अचानक वापसी बीजिंग के लिए अवसर और चुनौती दोनों बनकर उभरी। अवसर इसलिए, क्योंकि चीन आंशिक रूप से पश्चिम द्वारा खाली की गई शक्ति शून्य को भर सकता है। चुनौती इसलिए, क्योंकि तालिबान इस्लामिक आतंकवादी समूहों के साथ ऐतिहासिक संबंधों वाला एक संगठन है और चीन के पाकिस्तान को छोड़कर इस्लामिक देशों से संबंध कुछ ठीक नहीं हैं। अफगानिस्तान में 20 साल की उपस्थिति के बाद हाल ही में अमेरिकी सेना की वापसी ने तालिबान के लिए अफगानिस्तान पर नियंत्रण के रास्ते खोल दिए हैं और यह अब काबुल सरकार के लिए खतरा बनते जा रहा है।

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