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UK India FTA: ब्रिटिश पीएम ऋषि सुनक ने कहा- यूके भारत के साथ नए एफटीए लाने के लिए प्रतिबद्ध

पीटीआई, लंदन। Published by: देव कश्यप Updated Tue, 29 Nov 2022 05:00 AM IST
सार

ऋषि सुनक ने चीन के मामले में इन चीजों को अलग तरीके से करने की भी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश मूल्यों और हितों के लिए यह एक प्रणालीगत चुनौती है। 

पीएम मोदी और ऋषि सुनक (फाइल फोटो)।
पीएम मोदी और ऋषि सुनक (फाइल फोटो)। - फोटो : Social Media
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विस्तार

ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) के लिए ब्रिटेन की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साथ संबंधों को बढ़ाने को लेकर हम पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और इसी के हिस्से के रूप में भारत के साथ नए एफटीए लाने पर विचार कर रहे हैं। सोमवार रात लंदन के लॉर्ड मेयर द्वारा आयोजित औपचारिक भोज के दौरान अपने भाषण में ऋषि सुनक ने अपनी विरासत पर विचार किया और कहा कि दुनिया भर में "स्वतंत्रता और खुलेपन" के ब्रिटिश मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए वे प्रतिबद्ध हैं। पिछले महीने 10 डाउनिंग स्ट्रीट में पदभार ग्रहण करने के बाद यह उनका प्रमुख विदेश नीति के संबंध में पहला भाषण था।






उन्होंने चीन के मामले में इन चीजों को अलग तरीके से करने की भी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश मूल्यों और हितों के लिए यह एक प्रणालीगत चुनौती है। सुनक ने कहा कि राजनीति में आने से पहले मैंने दुनिया भर के व्यवसायों में निवेश किया और अब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में यह अवसर मिलना बड़ी बात है।

उन्होंने कहा कि 2050 तक, हिंद-प्रशांत यूरोप और उत्तरी अमेरिका के संयुक्त रूप से सिर्फ एक चौथाई की तुलना में आधे से अधिक वैश्विक विकास प्रदान करेगा।इसलिए  हम सीपीटीपीपी (प्रशांत-पार साझेदारी के लिए वृहद और प्रगतिशील समझौते) में शामिल हो रहे हैं और भारत के साथ नया एफटीए कर रहे हैं और इंडोनेशिया के साथ भी हमारा एक समझौता है।’

भारत और ब्रिटेन ने एफटीए के लिए जनवरी में वार्ता शुरू की थी और दीपावली तक निष्कर्ष पर पहुंचने का लक्ष्य रखा था, लेकिन कई मामलों पर आम सहमति नहीं बन पाने के कारण यह समय पर समाप्त नहीं हो सकी। एफटीए को लेकर वार्ता के दौरान व्यापार संबंधी बाधाओं को कम करने, करों में कटौती करने और एक दूसरे के बाजारों में सहज आयात और निर्यात के समर्थन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि कई अन्य लोगों की तरह मेरे दादा-दादी पूर्वी अफ्रीका और भारतीय उपमहाद्वीप के रास्ते ब्रिटेन आए और यहां अपना जीवन व्यतीत किया। हाल के वर्षों में हमने हांगकांग, अफगानिस्तान और यूक्रेन से आए हजारों लोगों का स्वागत किया है। हमारा देश अपने मूल्यों के लिए खड़ा है और यह  केवल शब्दों से नहीं बल्कि कार्यों से भी लोकतंत्र की रक्षा करता है।
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चीन को लेकर सुनक ने कहा कि वह यूके के दृष्टिकोण को "विकसित" करना चाहते हैं। उन्होंने सात साल पहले ब्रिटेन-चीन द्विपक्षीय संबंधों का वर्णन करने करते हुए पिछली कंजरवेटिव पार्टी की अगुवाई वाली सरकार द्वारा इस्तेमाल किए गए नारे से अपनी सरकार को अलग कर दिया।


उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि "अब यह स्पष्ट हो गया है कि तथाकथित स्वर्ण युग समाप्त हो गया है,  इस भोले विचार के साथ कि व्यापार सामाजिक और राजनीतिक सुधार की ओर ले जाएगा। इसलिए हमें शीत युद्ध के बयानबाजी पर भरोसा नहीं करना चाहिए। हम मानते हैं कि चीन हमारे मूल्यों और हितों के लिए एक प्रणालीगत चुनौती पेश करता है, यह एक ऐसी चुनौती है जो अधिक तीव्र होती जाती है क्योंकि यह और भी अधिक अधिनायकवाद की ओर बढ़ती जा रही है।

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