गहरा रहा है संकट: जब तेल भंडार खत्म हो जाएगा, तब क्या करेगा रूस!

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 16 Sep 2021 07:15 PM IST

सार

जानकारों का कहना है कि रूस पहले से ही तेल उत्पादन की समस्या से जूझ रहा है। इस साल जनवरी में रूस में तेल का उत्पादन न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया था। तब पूरी दुनिया के तेल ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मची हुई थी। कोरोना महामारी और इसकी वजह से लगे लॉकडाउन के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तब तेल की कीमतें काफी गिर गई थीं...
कच्चा तेल
कच्चा तेल - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार

रूस दुनिया में कच्चे तेल के सबसे बड़े निर्यातकों में एक है। लेकिन उसकी ये हैसियत ज्यादा समय तक कायम नहीं रहेगी। अगले कुछ दशकों के अंदर उसकी हालत ऐसी हो सकती है कि उसके अपने उपयोग के लिए भी तेल की कमी पड़ जाए। ताजा अनुमान के मुताबिक दो दशक के अंदर ही रूस का तेल भंडार खत्म होने लगेगा।
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रूस की फेडरल एजेंसी फॉर मिनरल रिसोर्सेज के कार्यवाहक प्रमुख एवगेनी पेत्रोव ने बुधवार को रूस के लिए चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा कि रूस के तेल भंडार की स्थिति वैसी नहीं है, जैसा आम तौर पर सोचा जाता है। उन्होंने पत्रकारों से कहा- ‘मुनाफे के स्रोत तेल भंडार अब सिर्फ 20-21 साल तक चलने लायक ही बचे हैं।’


पेत्रोव ने कहा कि अगर रूस दुनिया में कच्चे तेल के सबसे बड़े निर्यातकों की सूची में शामिल रहना चाहता है, तो उसे तुरंत नई टेक्नोलॉजी में भारी निवेश करना होगा। उसे उन तेल भंडारों की खोज करनी होगी, जिन तक पहुंचना अभी मुश्किल बना हुआ है। पेत्रोव ने अनुमान लगाया कि रूस के पश्चिमी साइबेरिया क्षेत्र में ऐसे विशाल तेल भंडार हो सकते हैं, जिसके बारे में अभी जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बात की संभावना है कि वहां ऐसे भंडार मिलें, जिनसे लंबे समय तक तेल निकालना मुमकिन हो।

जानकारों का कहना है कि रूस पहले से ही तेल उत्पादन की समस्या से जूझ रहा है। इस साल जनवरी में रूस में तेल का उत्पादन न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया था। तब पूरी दुनिया के तेल ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मची हुई थी। कोरोना महामारी और इसकी वजह से लगे लॉकडाउन के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तब तेल की कीमतें काफी गिर गई थीं।

इस साल की गर्मियों में रूस सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था संबंधी आंकड़े जारी किए। उससे पता चला कि रूस की अर्थव्यवस्था लगातार तेल और गैस पर कम निर्भर होती जा रही है। इस साल के पहले छह महीनों में रूस के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में तेल उद्योग का हिस्सा घट कर सिर्फ 15 फीसदी रह गया। जबकि एक साल पहले ये हिस्सा 20 फीसदी था। 2014 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में अचानक भारी गिरावट आ जाने से रूस की अर्थव्यवस्था की लड़खड़ा गई थी। तब से रूस ने मैनुफैक्चरिंग, केमिकल्स उत्पादन और भारी उद्योग पर अधिक ध्यान देना शुरू किया। उसका लाभ हुआ है। रूस सरकार का दावा है कि कच्चे तेल से जुड़े संकट का अब उसकी अर्थव्यवस्था पर पहले जैसा प्रभाव नहीं होगा।

कुछ हफ्ते पहले रूस ने कई कार्यदलों के गठन का एलान किया था। उन्हें इस बात की जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे अर्थव्यवस्था की निर्भरता पेट्रोकेमिकल्स पर घटाने और ग्रीन एऩर्जी के अधिक से अधिक उपयोग का रास्ता सुझाएं। रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री आंद्रेय बेलोसोव के नेतृत्व में ये पहल हुई है। बेलोसोव के मुताबिक मकसद ऐसा तरीका ढूंढना है, जिससे जीवाश्म ऊर्जा (फॉसिल फ्यूअल) से ग्रीन ऊर्जा की तरफ जाना रूस के लिए खतरे का नहीं, बल्कि अवसरों से भरा एक मौका बन जाए।
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