क्या पुतिन के साथ शिखर वार्ता से बाइडन सुलझा पाएंगे रूस की पहेली? क्रेमलिन ने दिया ये जवाब

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मास्को Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 27 May 2021 02:18 PM IST

सार

रूसी राष्ट्रपति के कार्यालय क्रेमलिन के प्रवक्ता ने बेलाग यह कहा कि मुलाकात से ज्यादा उम्मीदें ना जोड़ना ही बेहतर है। बाइडन और पुतिन 16 जून को स्विट्जरलैंड में मिलेंगे। दोनों देशों के तमाम पर्यवेक्षकों का मानना है कि भले इस मुलाकात से दोनों देशों के गहरे मतभेद दूर ना हों, फिर भी दोनों राष्ट्रपतियों का मिलना ही अहम है...
व्लादिमीर पुतिन के साथ जो बिडेन
व्लादिमीर पुतिन के साथ जो बिडेन - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार

अगले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली मुलाकात से दोनों देशों का रिश्ता ‘री-सेट’ हो पाएगा (यानी नया रूप ले सकेगा) इसकी उम्मीद कम से कम रूस को तो नहीं है। क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति के कार्यालय) के प्रवक्ता ने बेलाग यह कहा कि मुलाकात से ज्यादा उम्मीदें ना जोड़ना ही बेहतर है। गौरतलब है कि बाइडन और पुतिन 16 जून को स्विट्जरलैंड में मिलेंगे। दोनों देशों के तमाम पर्यवेक्षकों का मानना है कि भले इस मुलाकात से दोनों देशों के गहरे मतभेद दूर ना हों, फिर भी दोनों राष्ट्रपतियों का मिलना ही अहम है। इससे कुछ मतभेदों को पाटने की राह निकल सकती है।
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दोनों देशों के रिश्तों के संदर्भ में री-सेट शब्द का इस्तेमाल पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने किया था। 2009 में राष्ट्रपति पद संभालने के तुरंत बाद उन्होंने रूस के साथ रिश्ते को री-सेट करने का इरादा जताया था। उस समय दिमित्री मेदवेदेव रूस के राष्ट्रपति थे। बराक ओबामा के घोषित इरादे के मुताबिक दोनों देशों के राष्ट्रपतियों की मुलाकत हुई थी। उसमें दोनों देशों ने सामरिक हथियारों में कटौती करने, और ईरान और उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रमों के बारे में साझा रुख तय करने का एलान किया था। लेकिन उसके बाद बात ज्यादा आगे नहीं बढ़ी।


क्रेमलिन के प्रवक्ता ने इसी तरफ इशारा करते हुए कहा कि रिश्तों को री-सेट करने के बारे में रूस का अनुभव अच्छा नहीं रहा है। उन्होंने कहा- यह साफ है कि दोनों देशों के संबंधों में जो नकारात्मकता आ चुकी है, उसे दूर करना कठिन है। उन्होंने इस तरफ भी ध्यान दिलाया कि स्विट्जरलैंड में होने वाली मुलाकात के दौरान किसी करार या सहमति पत्र दस्तखत होने का कोई कार्यक्रम नहीं है। इसके पहले क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि बाइडन ने पुतिन के बारे में जो अनुचित टिप्पणी की थी, उसे पुतिन मुद्दा नहीं बनाएंगे। गौरतलब है कि राष्ट्रपति बनने के कुछ समय बाद एक टीवी इंटरव्यू में बाइडन ने इस कथन से सहमति जताई थी कि पुतिन ‘हत्यारे’ हैं।

यहां दी गई जानकारियों के मुताबिक अमेरिका और रूस के बीच बढ़ते तनाव के बीच अप्रैल में बाइडन ने पुतिन को फोन कर उनके सामने शिखर बैठक का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने कहा था कि शिखर बैठक के दौरान दोनों देशों के रिश्तों के सभी पहलुओं पर विचार-विमर्श करने का मौका मिलेगा। पुतिन ने अब इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। लेकिन इसके पहले पिछले महीने उनके प्रवक्ता ने कहा था कि पुतिन अमेरिका को रूस के साथ ताकतवर की हैसियत से बात नहीं करने देंगे। पुतिन चाहते हैं कि अमेरिका पारस्परिक सम्मान की भावना के साथ बात करे।

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी खेमे के देशों में ये राय बनी है कि प्रतिबंध रूस के खिलाफ कारगर नहीं हो रहे हैं। मुमकिन है कि इस राय के कारण ही बाइडन ने बातचीत से समाधान निकालने की बात सोची हो। गौरतलब है कि इसी हफ्ते मंगलवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा था कि प्रतिबंध रूस और पश्चिमी देशों के बीच रचनात्मक संबंध बनाने के लिहाज से मददगार नहीं हो रहे हैं। उन्होंने यूरोपियन यूनियन को रूस के प्रति अपनी विदेश नीति की समीक्षा करने की सलाह दी थी। मैक्रों ने कहा था- ‘मेरी राय रूस से संबंध के मामले में यह सच का सामना करने का वक्त है। इस विचार विमर्श से हम दोनों पक्षों के बीच मौजूद तनाव पर पुनर्विचार करेंगे और तब वे फैसला कर पाएंगे कि हमें क्या करना चाहिए।’

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