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अमेरिका की मुश्किल: दुश्मनों ने बनाया मोर्चा, जबकि दोस्त हैं असमंजस में

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 16 May 2022 05:06 PM IST
सार

जो बाइडन प्रशासन में खुफिया एजेंसियों की प्रमुख एवरिल हेइन्स ने कहा कि चार देशों ने पश्चिम विरोधी साझा अभियान छेड़ दिया है। ये देश चीन, रूस, ईरान और उत्तर कोरिया हैं। इन चारों देशों ने अपने हितों को आगे बढ़ाने का इरादा और क्षमता दिखाई है...

जो बिडेन और बोरिस जॉनसन के साथ स्कॉट मॉरिसन
जो बिडेन और बोरिस जॉनसन के साथ स्कॉट मॉरिसन - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार

अमेरिका की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों में ये आम राय उभरी है कि मौजूदा वैश्विक होड़ में अमेरिका को एक साथ कई विरोधी देशों का सामना करना पड़ रहा है। इन देशों में सबसे अहम चीन है। बीते हफ्ते अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के ऊपरी सदन सीनेट की सशस्त्र सेना समिति की तरफ से आयोजित सुनवाई में ये राय उभरी। अधिकारियों ने कहा कि हालांकि अभी यूक्रेन युद्ध सबसे ज्यादा चर्चा में है, लेकिन अमेरिका को मुख्य चुनौती चीन से है। इसलिए अमेरिका को ताइवान के मामले में चीनी सेना की योजनाओं पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।



सुनवाई के दौरान सैनिक और असैनिक खुफिया एजेंसियों के बड़े अधिकारियों ने अपना आकलन समिति के सामने रखा। जो बाइडन प्रशासन में खुफिया एजेंसियों की प्रमुख एवरिल हेइन्स ने कहा कि चार देशों ने पश्चिम विरोधी साझा अभियान छेड़ दिया है। ये देश चीन, रूस, ईरान और उत्तर कोरिया हैं। इन चारों देशों ने अपने हितों को आगे बढ़ाने का इरादा और क्षमता दिखाई है। उनके ये हित अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के हितों के खिलाफ जाते हैं।

चीन, रूस, ईरान और उत्तर कोरिया हैं अमेरिका के लिए खतरा

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन में स्थित डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी के निदेशक स्कॉट बेरियर ने कहा कि ये चारों देश अमेरिका के लिए खतरा पैदा कर रहे हैँ। ताइवान के प्रति चीन का रुख आक्रामक है, रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया है, ईरान पश्चिम एशिया में छद्म युद्ध में जुटा हुआ है, और उत्तर कोरिया पश्चिम प्रशांत क्षेत्र और उससे लगी अमेरिकी भूमि के लिए खतरा उत्पन्न कर रहा है।

वेबसाइट एशिया टाइम्स में छपे एक विश्लेषण के मुताबिक अमेरिका का यह मानना कि चीन, रूस, ईरान, और उत्तर कोरिया अमेरिका, नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन), यूपोयिन यूऩियन. और जापान के सामने खड़े हो गए हैं, एक तरह के वैश्विक युद्ध की बिसात सजने जैसा है। लेकिन उसकी एजेंसियों की यह राय भी है कि इस मुद्दे पर दुनिया के ज्यादातर देश उसके साथ खड़े नहीं हैं।

2027 तक चीन ताइवान पर हमला करेगा

हेइन्स ने कहा कि बड़े लोकतांत्रिक देशों ने अभी तक अपना पक्ष नहीं चुना है। उन्होंने इस सिलसिले में भारत, इंडोनेशिया, नाइजीरिया, और दक्षिण अफ्रीका का नाम लिया। साथ ही कहा कि कई अन्य विकासशील देशों का भी ऐसा ही रुख है। बेरियर ने कहा- ‘दुनिया का ज्यादातर हिस्सा हमारे साथ नहीं है। संभव है कि वे रूस के साथ भी नहीं हों। लेकिन लोकतांत्रिक देशों का वैश्विक गठबंधन बनाने के हमारे आह्वान से वे सहमत नहीं दिखते हैं।’ उन्होंने कहा- ‘अमेरिका के अभी भी उन देशों के साथ दोस्ताना रिश्ते हैं, लेकिन हम उन देशों को यूक्रेन के मसले पर अपने साथ खड़ा नहीं कर पाए हैं।’


खुफिया अधिकारियों ने उम्मीद जताई कि चीन निकट भविष्य में ताइवान के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगा। उन्होंने कहा- संभव है कि यूक्रेन युद्ध के अनुभवों को देखते हुए ताइवान पर हमला करने को लेकर चीन का आत्म विश्वास घटे। लेकिन हेइन्स और बेरियर दोनों ने कहा कि साल 2027 तक चीन ताइवान पर हमला करेगा। उन्होंने सलाह दी कि ताइवान को बेहतर हथियार खरीद कर और अपनी सेना को अधिक चुस्त बना कर चीनी हमले का मुकाबला करने की तैयारी करनी चाहिए।

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