Hindi News ›   World ›   WHO 'deeply concerned' over COVID vaccines approved for emergency use not being recognised in all countries 

डब्ल्यूएचओ ने कहा: कोरोना वैक्सीन को सभी देशों में मान्यता न दिया जाना बेहद निराशानजक 

पीटीआई, संयुक्त राष्ट्र Published by: Amit Mandal Updated Thu, 07 Oct 2021 09:54 PM IST

सार

डब्ल्यूएचओ ने चिंता जताई कि प्रभावी साबित हुए टीकों को आपातकालीन उपयोग सूची प्रक्रिया में डालने के बावजूद सभी देशों में मान्यता नहीं दी जा रही है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन
विश्व स्वास्थ्य संगठन - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि उसके द्वारा अनुमोदित कोरोना वैक्सीन को सभी देशों में मान्यता न दिया जाना बेहद निराशाजनक है। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि वह इस बात से बहुत चिंतित है कि जो कोविड-19 टीके प्रभावी साबित हुए हैं और आपातकालीन उपयोग के लिए अनुमोदित किए गए हैं, उन्हें सभी देशों में मान्यता नहीं दी जा रही है। 

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एक प्रेस वार्ता में डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधोनाम घेब्रेयसस के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. ब्रूस आयलवर्ड ने कहा कि हम फिर से सभी देशों से प्रभावी और सुरक्षित साबित होने वाले टीकों की मान्यता सुनिश्चित करने के लिए कह रहे हैं।  


उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए टीकों को मान्यता देने के महत्व पर डब्ल्यूएचओ पूरी तरह सजग है। डब्ल्यूएचओ द्वारा प्रभावी साबित हुए टीकों को आपातकालीन उपयोग सूची प्रक्रिया में डालने के बावजूद सभी देशों में मान्यता नहीं दी जा रही है।

डब्ल्यूएचओ में टीकाकरण, टीके और जैविक विभाग की निदेशक डॉ. कैथरीन ओब्रायन ने कहा कि टीकों की मान्यता एक महत्वपूर्ण मुद्दा है क्योंकि यह लोगों को अधिक खुराक के साथ टीकाकरण करने के लिए प्रेरित करता है। हमें स्थिति में टीके को लेकर इस तरह का रवैया नहीं अपनाना चाहिए जब टीकों की आपूर्ति पहले से ही कम है और लोग बड़ी मुश्किल से इसे हासिल कर पा रहे हैं। 

ब्रिटेन ने नहीं दी कोविशील्ड को मान्यता 
बता दें कि भारत में बनी कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड को ब्रिटेन ने अभी तक मान्यता नहीं दी है। दोनों डोज ले चुके लोगों को भी ब्रिटेन पहुंचने के बाद क्वारंटीन होना पड़ रहा है। भारत द्वारा विरोध जताने के बावजूद ब्रिटेन ने अपने रुख में बदलाव नहीं किया। इसे देखते हुए भारत ने भी जवाबी कार्रवाई की है और ब्रिटेन से आने वाले नागरिकों के लिए क्वारंटीन होने की शर्त लगाई है। वहीं अभी तक भारत में बनी कोवैक्सीन को डब्ल्यूएचओ से ही मान्यता नहीं मिल पाई है। भारत बायोटेक तमाम सैंपल और आंकड़े मुहैया करवा चुका है अभी इसे लेकर डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञों की टीम जांच और अध्ययन कर रही है और कुछ दिनों में इसका परिणाम आने की उम्मीद है। 

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